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ज़िंदगी की आस बाकी है – पूनम कुमारी

Punam Kumari

Punam Kumari

ज़िंदगी की आस बाकी है

टूटे सपनों की किरचों में,
अब भी कोई उजास बाकी है,
थकी हुई इन साँसों में,
जीवन का मधुमास बाकी है।

राहों ने काँटे बिछाए तो
पाँवों ने चलना सीख लिया,
आँधियों ने दीप बुझाया तो
मन ने जलना सीख लिया।

कितनी बार समय ने मुझको
हार का चेहरा दिखलाया,
पर हर बार मेरे साहस ने
जीवन को फिर गले लगाया।

गिरना अंत नहीं जीवन का,
गिरकर उठना शान है,
जिसके भीतर ज्वाला जलती,
उसकी अपनी पहचान है।

अँधियारे से मत घबराना,
रात सदा रहती नहीं,
क्षितिज के उस पार सवेरा
कभी किसी से कहता नहीं।

बंद दरवाज़ों के आगे
बैठकर रोना छोड़ दे,
अपने हाथों की रेखाओं से
नई कहानी जोड़ दे।

पत्थर जैसे दिन आएँ तो
हौसलों से राह तराश,
सूखे अधरों पर मुस्कान रख,
आँखों में रख नई तलाश।

जो खोया, उसका शोक न कर,
जो पाया, उसका मान कर,
कल की चिंता छोड़ मुसाफिर,
आज को तू महान कर।

तू स्वयं अपना दीप बन,
तू स्वयं अपनी राह बन,
दुनिया चाहे लाख रोक ले,
तू अपने सपनों की चाह बन।

जब अपने भी दूर हुए,
तब एक विश्वास करीब रहा,
जब शब्द सभी मौन हुए,
तब मन का संगीत अजीब रहा।

दर्द मिला तो गीत बना,
आँसू मोती बनते गए,
जितने गहरे घाव मिले,
उतने ही सपने खिलते गए।

जीवन कोई बोझ नहीं है,
जीवन एक उपहार है,
हर धड़कन यह कहती है—
अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

अभी क्षितिज को छूना है,
अभी नभ में उड़ना बाकी है,
अभी समय की धारा में
अपना नाम लिखना बाकी है।

अभी किसी की आँखों में
उम्मीद बनकर आना है,
अभी किसी के सूने जीवन में
एक दीप जलाना है।

इसलिए थमना मत मन,
कठिनाइयों से हार मत मान,
तेरे भीतर शक्ति अनंत है,
बस खुद को पहचान।

जब तक साँसों में स्वर है,
जब तक धड़कन में राग है,
तब तक जीवन की राहों में
एक नया सुहाग है।

कल फिर सूरज निकलेगा,
कल फिर फूल खिलेंगे,
जो आज अकेले चलते हैं,
कल उनके साथ मिलेंगे।

अंत नहीं यह अँधियारा,
यह तो प्रभात से पहले की रात है,
टूटे हुए सपनों के भीतर भी
एक नई शुरुआत है।

मंज़िल चाहे दूर खड़ी हो,
पग-पग पर अवरोध मिले,
फिर भी मन में दीप जलाए
हमको आगे बढ़ना है।

क्योंकि—

हार नहीं स्वीकार करेंगे,
आशा का दीप जलाए रखेंगे,
आँधी चाहे जितनी आए,
जीवन से प्रेम निभाए रखेंगे।

और जब कभी लगे कि
सब कुछ हमसे छूट गया है,
बस इतना याद रखना—

अभी धड़कन बाकी है,
अभी अरमान बाकी है,
अभी सपनों की उड़ान बाकी है,
अभी कर्म का अभियान बाकी है—
अभी तो जीवन की
सबसे सुंदर मुस्कान बाकी है।

हाँ,
टूटे हुए सपनों में भी
एक आस बाकी है,
जब तक साँसें चलती हैं—
ज़िंदगी की आस बाकी है।

कवयित्री परिचय

पुनम कुमारी
उच्च माध्यमिक विद्यालय, करजा
प्रखंड — शाहपुर
जिला — भोजपुर, बिहार

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