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आद्य गुरुओं की महिमा

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कविता: “आद्य गुरुओं की महिमा”

सृष्टि के प्रथम आदि गुरु ‘सत्यम शिवम सुंदरम’;
कला योग तंत्र अस्त्र शस्त्र के ज्ञानी शिव है अनुपम।

चारो वेदों के संकलनकर्ता महाभारत पुराणों के गुरु;
गुरु पूर्णिमा गंगा स्नान के दिन जीवन होती है शुरू।

नीति धर्म व अध्यात्म शास्त्रों के रचनाकार है बृहस्पति;
जिन्हें देवताएँ भी पूजते-प्रणाम करते बारम्बार हैं वह वाचस्पति।

असुरों एवं दैत्यों के गुरु थे शुक्राचार्य;
मृत संजीविनी विद्या के थे वह अद्भुत कलाकार।

सूर्यवंश भगवान राम के कुलगुरु थे ऋषि वशिष्ठ;
योगवाशिष्ठ हैं इनके प्रसिद्ध ग्रंथ ज्ञान में थे सबसे विशिष्ट।

अस्त्र-शस्त्र के महान ज्ञानी ब्रह्मऋषि थे विश्वामित्र;
राम-लखन से तारका वध करा कर,थे वह सच्चरित्र।

विष्णु के अवतार अस्त्र विद्या के महान आचार्य थे वह परशुराम;
भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को युद्धकला के ज्ञानदाता जीते थे कई संग्राम।

महाभारत कालखंड धनुर्विद्या के ज्ञाता थे वह गुरु द्रोणाचार्य;
कौरवो-पांडवो के राजगुरु, अंगूठा दिए एकलब्य ऐसे थे वह कृपाचार्य।

श्रीकृष्ण-सुदामा के गुरु थे ऋषि सांदीपनि;
गीता-मित्रता के पाठ पढ़ाने वाले ऐसे थे उज्जैनी निशानी।

वेदों व शास्त्रों के मर्मज्ञ थे ऋषि भारद्वाज;
गुरु द्रोण के थे पिता, जानता है यह समाज।

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Chandrakant Kumar

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