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कर्मठ बालक

कर्मठ बालक

प्रखर तेज सा निखरो  बल शाली बन उभरो ।

रूको ना कही पर ना टूटो ना बिखरो।

बुलंदियों को बना लो ठिकाना।

चाहे राह जैसी हो दुर्गम से होकर  ।

ओ मेरे प्यारे सीख रखना संजोकर। ।

 

सितारों से दूर सितारों से ऊपर ।

गुजरना पड़ेगा सितारों से होकर।

ओ मेरे प्यारे नन्हे मुन्ने सितारे ।

किंचित रूको न, घटा भी छाए घेर कर ।

ओ मेरे प्यारे सीख रखना संजोकर। ।

 

आएगी बाधाएं अपरिमित न कह कर।

न रहोगे सजग तो देंगी  जीवन जहर कर ।

बन कर्मठ हठ ऐसा ही तू कर।

तेरी कीर्ति ही तुझे जाए अमर कर।

ओ मेरे प्यारे सीख रखना संजोकर। ।

 

अभी तो उमर तेरी है बचपन की  ।

मचलना, बहकना ये दौर है फिसलन की।

जीवन में मिलेंगे कहीं दलदल , कही ठोकर ।

गिरना तो  उठना ऐ बाबू सम्भल कर।

वो मेरे प्यारे सिख रखना संजोकर। ।

 

तू ही भावी नेता विचारक , सुधारक ।

तू ही  प्रबल योद्धा , मा भारती के सहायक ।

उत्तुंग शिखर पर फहराना तिरंगा ।

बन जग नायक,  फिर देश  नेतृत्व कर ।

ओ मेरे प्यारे सीख रखना संजोकर ।।

 


रचनाकार – राजकुमारी , विशिष्ट शिक्षिका

विद्यालय – प्राथमिक विद्यालय न्यू बंधु टोला, दानापुर पटना – 801105

मोबाइल नंबर – 9334269971

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Raj Kumari

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