जनवरी
जब-जब जनवरी है आती,
तब-तब ठंडक है लाती;
प्राणी घर में दुबके रहते,
ठंडक उनको है ठिठुराती।
बच्चे बूढ़ों पर तो यह,
काल जैसी ही मंडराती;
युवा भी तो नहीं सुरक्षित,
बीसों कपड़े उन्हें पहनाती।
हमारे लिए जनवरी फिर भी,
खुशियां लेकर है आती;
लोहड़ी, पोंगल, मकर-संक्रांति,
से है हमको एक कराती।
छब्बीस जनवरी की तारीख,
भारत में महा उत्सव लाती;
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सबमें एकता भाव जगाती।
कर्तव्य पथ पर भारत की,
आन बान ओ शान झलकती;
सैनिक टुकड़ियां अपने बल से,
सबको है परिचित करवाती।
अंत होते-होते जनवरी,
हमको दु:ख है दे जाती;
महात्मा गांधी बापू की,
श्रद्धांजलि हमसे दिलवाती।
ब्रजेश कुमार वर्मा
प्रधान शिक्षक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय पानापुर गोसाईं टोला, मीनापुर, मुजफ्फरपुर
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Brajesh Kumar Verma


