Site icon पद्यपंकज

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

जीभ का स्वाद और बेडौल शरीर

स्वाद के चक्कर में फंसकर,

शरीर हुआ आज बेडौल।

पिज़ा, बर्गर, चाउमीन खाकर,

बिगाड़ लिया जीवन का तोल।

मुँह का अच्छा स्वाद बताकर,

पल भर का सुख पाया है।

पर भीतरी इस काया का,

हमने ही नाश कराया है।

पेट की भूख मिटाने को,

बस ठूस-ठूस कर खाया है।

पेट को अच्छा लगे न लगे,

यह कभी समझ न पाया है।

ऊपर से कोल्डड्रिंक पीकर,

ज़हर रगों में घोला है।

सेहत का बुरा हाल बनाकर,

बीमारियों का द्वार खोला है।

वक्त है अब भी संभल जाओ,

छोड़ो यह जंक फूड का जाल।

सच्ची भूख को पहचानो तुम,

मत करो अपनी सेहत बेहाल।

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

प्राथमिक विद्यालय रेही टोला

रानीगंज अररिया

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version