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बिहार का शिक्षक-मनु कुमारी

टूटी बेंचों, टपकती छतों के बीच

वह शिक्षक खड़ा है—

हाथ में केवल चाक नहीं,

हाथ में बच्चों का भविष्य है।

सीमित साधन, अनगिनत चुनौतियाँ,

फिर भी हार नहीं मानता—

वह TLM से

ज्ञान को जीवंत करता है,

और सीख को अनुभव बनाता है।

कभी काग़ज़ की नाव से गणित समझाता,

कभी बोतल, पत्थर, तिनके बने औज़ार,

कभी दीवार ही बन गई ब्लैकबोर्ड,

तो कभी ज़मीन पर उकेरे गए अक्षर-आकार।

कभी ताली से गिनती सिखाता है,

कभी कहानी से विज्ञान।

कभी मिट्टी से गणित रचता,

कभी गीतों में इतिहास।

पाठ्यपुस्तक उसकी सीमा नहीं,

वह जीवन को ही पाठ बनाता है,

हर बच्चे की आँखों में

सीखने की चिंगारी जगाता है।

कुपोषण, गरीबी, भटकाव ,भय और अभाव के बीच,

वह बच्चों को आत्मविश्वास की डोर थमाता है।

वह केवल पढाता नहीं – 

वह गढ़ता है – 

अक्षरों से स्वप्न,

स्वप्नों से संकल्प,

और संकल्प से चरित्र।

प्रशासनिक बोझ, आदेशों का दबाव, तकनीकी अंतर,समाज की अपेक्षाएं,

सबके बीच वह बच्चों के मन तक पहुंचता है।

बिहार का शिक्षक आज भी, व्यवस्था से नहीं,

विश्वास से लड़ता है।

हजारों मुसीबत होने के बावजूद 

 भी कक्षा में

उसकी मुस्कान अडिग रहती है।

वह जानता है—

हर बच्चा एक किताब नहीं,

एक संभावना है,

एक भविष्य है।

जब कोई बच्ची

पहली बार पढ़ना सीखती है,

तो शिक्षक के भीतर

सदियों का संघर्ष

मुस्कुरा उठता है।

बिहार का शिक्षक

केवल पढ़ाता नहीं—

वह गढ़ता है

चरित्र, चेतना और नागरिक।

नवाचार उसका अस्त्र है,

संघर्ष उसकी पहचान,

और शिक्षा उसका धर्म।

सलाम है उस शिक्षक को

जो हर दिन कहता है—

“बच्चे सीखेंगे,

बच्चे बढ़ेंगे।

हर बच्चा, श्रेष्ठ बच्चा! अप्पन बिहार, निपुण बिहार,

और यहीं से

बिहार बदल रहा है।

निपुण भारत का लक्ष्य 

बहुत जल्द हीं पूरा होगा।

स्वरचित एवं मौलिक 

मनु रमण” चेतना”

विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी

राघोपुर,सुपौल

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