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ममता की मूर्ति – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

Jainendra

Jainendra prasadRavi

ममता की मूर्ति
मनहरण घनाक्षरी छंद में


पालन पोषण हेतु,
खुद कष्ट सहती है,
ममता की प्रतिमूर्ति, भारतीय नारी है।

बच्चों को भी पालती हैं,
गृहस्थी संभालती हैं,
चौका-चूल्हा करने की, लेती जिम्मेदारी है।

दुनिया की जननी है,
पत्नी बेटी भगिनी है,
ऋषि-मुनि ब्रह्मांड की, पूज्य महतारी है।

वेदना पीड़ा को सह,
संतानों को जन्म देती,
मांँ का रोम-रोम ऋणी, जिंदगी हमारी है।

जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

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