हमारी हिंदी- पुरुषोत्तम कुमार
सदस्या है यह भारोपीय भाषा परिवार की।
कविता उत्थान, उत्कर्ष, सत्कार और संस्कार की।
आर्य भाषा के रूप में इसकी है सकल पहचान।
अपनी रचनाओं में समेटा है इसने संपूर्ण जहान।
पूर्वी और पश्चिमी हिंदी
इसकी है शाखाएं।
अवधी,बघेली,छत्तीसगढ़ी पूर्वी हैं भाषाएं।
ब्रजभाषा,खड़ीबोली,
हरियाणवी, बुन्देली पश्चिमी की धाराएं।
रामचरितमानस है अवधि भाषा की शान।
सुरसुरावली से बढ़ता है ब्रजभाषा का मान।
तुलसी, जायसी हैं पूर्वी
के अमर गायक।
सूरदास, रसखान,घनानंद
पश्चिमी के अमर नायक।
बिहारी के दोहे देखन में लगे छोटे।
अपने भीतर छिपा रखें रहस्य मोटे।
पूर्वी और पश्चिमी हिंदी दोनों बनी जन जन की भाषाएं,देश प्रेम का पाठ पढ़ाकर खड़ी बोली इतराए।
खड़ी बोली में साकेत सा महाकाव्य रच डाला।
पुरुषोत्तम कुमार
प्रधान शिक्षक
उर्दू प्राथमिक विद्यालय लोदीपुर गोलघर
अंचल- पटना
