हार -जीत तो लगी है जग में
हो राहों में चाहे बाधा हजार
जीवन की सदा यही पुकार
हार जीत तो लगी है जग में
हँसकर उसे तू कर स्वीकार
है दूर मंजिल तो क्या भय
हैं पर्वत ऊँचे तो क्या भय
होता नाम उसी का जग में
पथ पर नित चला जो निर्भय
गहन तम को चीरकर भी
करता आलोकित घर संसार
हार जीत तो लगी है जग में
हँसकर उसे तू कर स्वीकार
जल रहा क्षण क्षण दिनकर
धूमिल दिशाएँ ,नीरव अंबर
गिर रहे हैं जो वज्र नभ से
अंतस भरे उर -हिम-गह्वर
उर के गम को पिघलाकर
सींच ले अपना दीप्त संसार
हार जीत तो लगी है जग में
हँसकर उसे तू कर स्वीकार
क्षुब्ध जलधि में उठे हिलोर
या दुर्गम हो कर्मपथ चहुंओर
उत्तुंग शिखर को वही चढ़ेगा
हौसलों संग जो बढ़े चहुँओर
पुष्प सम खिलेंगे राहों के शूल
कर ले उसे तू अब अंगीकार
हार जीत तो लगी है जग में
हँसकर उसे तू कर स्वीकार
बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी
प्रखंडकुर्साकांटा जिला अररिया
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