Site icon पद्यपंकज

Ram Kishore Pathak

Ram Kishore Pathak

 

कटे पेड़ से चाहते हैं भलाई

मिलेगी कभी भी। 

फटे वस्त्र की चाहते हैं जुड़ाई

सिलेगी कभी भी।।

नहीं है उजाला करूँ तो करूँ क्या 

मरा भी न जाता।

सुना है कि अंधे सभी दौड़ते हैं 

रहा भी न जाता।।

भरी जिंदगी साथ की है कमाई

ढली ही नहीं जो।

चले थे लगाते भली वाटिका को

फली ही नहीं जो।

हुआ है अजूबा कमाई करोड़ों 

कई पेट भूखे। 

नहीं नींद आती मुझी में बुराई

कई नेत्र सूखे।।

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version