शीर्षक :- मेरी माँ
माँ शब्द एक और अर्थ है अनेक,
यह कैसे कर दिखलाती हो ।
इस एक शब्द के बोझ तले,
कहीं खोकर तो न रह जाती हो ।
है व्यंजन की तो बात कहाँ,
तुम नीर भी मधु बनाती हो ।
वायु सा वेग, सूरज सी ऊर्जा,
नित रोज कहाँ से लाती हो ।
मेरी नादानियों और शैतानियों पर,
जब जोर से डाँट लगाती हो ।
फिर बड़ी – बड़ी इन आँखों में,
अँश्रु क्यों ले आती हो ।
इतनी स्नेही बन जाती हो,
संतान को अपने हृदय में बसाती हो ।
माँ इस एक शब्द के बोझ तले,
कहीं खोकर तो न रह जाती हो ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार ।
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