शीर्षक :- सूरज उगले आग ।
मम्मी , मुझको बहुत सताती ,
यह गरमी की तपती धूप ।
मैं नही खेलने जाऊँगा,
और न पढ़ने जाऊँगा ।
रंग काला हो जाता है,
खूब पसीना आता है ।
मम्मी, मेरे अंग जलाती,
देखो सूरज आग उगलती ।
जब भी बाहर जाता हूँ,
मैं बेहद थक जाता हूँ ।
चमक – चमककर हमें चिढ़ाती,
लोहे – सी ये देह तपाती ।
लोग बेहाल हो जाते हैं,
लगती कड़वी है ये धूप ।
थोड़े कहीं से बादल आये,
शीतल मौसम हो जाए ।
वर्षा की अब है चाहत
जिनसे मिले जग को राहत ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार
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