कविता :- आया बसंत
दिन को सूरज लगा चमकने,
हवा लगी अब सरसर बहने ।
पत्ते पीले पड़े पेड़ के,
झड़ते हवा संग हैं उड़ते ।
ऋतु बसंत का स्वागत करने,
नई कोपलें सज गई पेड़ पर ।
सेमल खिलता लाल फूल से,
टेसू फूला डाल – डाल पर ।
नई बौर छा गई आम पर,
महुआ गिरता सुबह टपककर ।
कड़ी ठंड ना गर्मी ज्यादा,
तन – मन फुर्ती से भर जाता ।
कोयल पंचम सुर में गाती,
मीठा मंगल गान सुनाती ।
कूक – कूक कर डाली – डाली,
सबके कानों में कह जाती ।
ऋतु बसंत छाई मतवाली,
कचनारों की छटा निराली ।
सरसों फूली पीली – पीली,
बीच खिली है अलसी नीली ।
सरसों खेत बसंती रंग का,
हवा चली पीला रंग लहरा ।
मेला लगा रंग खुशबू का,
लगता है मानो फाल्गुन का जादू है ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार
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