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सूरज दादा -आशीष अम्बर

शीर्षक :- सूरज दादा ।

सूरज दादा , सूरज दादा,
लगते कितने प्यारे – प्यारे ।
चलते – चलते सुबह से शाम,
कभी नहीं तुम थककर हारे ।

सुबह – सुबह दुनिया करती है,
दादा, तुमको रोज प्रणाम ।
हर रोज तुम सबको जगाकर,
करते हो दिन भर काम ।

पूरी धरती , पूरे नभ में,
दादा, तुम करते उजियारे ।
सूरज दादा, सूरज दादा,
लगते कितने प्यारे – प्यारे ।

नौ ग्रहों के तुम हो दाता,
सभी की है तुमसे पहचान ।
तुमसे ही जीवन पाते हैं,
पूरी धरती और इंसान ।

हर मौसम में रूप बदलते,
साथ – साथ अपने रंग – ढ़ंग ।
कभी लुटाते चाँदी – सोना,
कभी हो जाते तुम बदरंग ।

गरमी में गुर्राते रहते,
सर्दी में रोते बेचारे ।
सूरज दादा , सूरज दादा,
लगते कितने प्यारे – प्यारे ।

आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

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