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बाल श्रम नहीं, पढ़ने की उम्र है-राहुल कुमार रंजन

खेलने-कूदने की उम्र है, अभी बढ़ने दो,

नन्हे हाथों में काम नहीं, सपने रहने दो।

कंधों पर बस्ते सजने दो,

ज्ञान के दीपक जलने दो।

हँसी-खुशी से बचपन बीते,

उनको आगे बढ़ने दो।

कलम पकड़ें, किताबें पढ़ें,

जीवन का आधार गढ़ें।

मजबूरी की जंजीरों से,

उनको मुक्त निकलने दो।

देश का उज्ज्वल भविष्य हैं ये,

आशा की नई किरण हैं ये।

श्रम नहीं, शिक्षा का अधिकार,

हर बच्चे को मिलने दो।

खेलने-कूदने की उम्र है, अभी बढ़ने दो,

नन्हे हाथों में काम नहीं, सपने रहने दो।

राहुल कुमार रंजन

प्रधानाध्यापक

मध्य विद्यालय ओरलाहा

बड़हरा कोठी, पूर्णिया

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