अपने भाग्य को तुम आकार दो,
स्वतंत्रता समानता स्वीकार लो,
गलतियों से सदा सीखो तुम,
गौरवशाली अतीत को सम्मान दो।
बाबा साहेब की ये सारी बातें हैं,
संविधान रूपी देश को दी सौगातें हैं,
संघर्ष को जीवन मूल माना जिसने
धर्म मनुष्य के लिए दिन और रातें हैं।
शिक्षित होने पर जिसने जोर दिया,
संगठित होने को जिसने सबसे कहा।
महिलाओं की प्रगति ही जिसने समाज की प्रगति जाना,
काम के बंटवारे से ही जिसने जाति को पहचाना।
संविधान के जनक को है शत शत नमन,
ऋणी है उनका देश का हर तन मन
कलम की ताकत से जिसने सबका परिचय करवाया
सामाजिक समरसता को बताया सबसे बड़ा धन।
रूचिका
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार
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