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बसंती शाम- मनु कुमारी

बसंती शाम उतर आई, सुनहरी धूप के संग,
क्षितिज ने ओढ़ ली चूनर, केसरिया रंग के रंग।

मंद पवन की उँगली थामे, सरसों हँसने लगी,
डाल-डाल पर बैठी चिड़िया, राग नया गाने लगी।

फूलों ने खुशबू बिखेरी, गलियों तक आई बात,
धरती ने पहनी हरियाली, सजी हुई हर एक घाट।

आँगन में फैली उजास की, मीठी-सी मुस्कान,
हर मन के कोने में जागा, कोई सपना अनजान।

सूरज ढलकर कहता जाए, दिन का सारा सार,
थकी पगडंडियाँ भी गुनगुनाएँ, प्रेम भरा उपहार।

बसंती शाम सिखा जाती, जीवन का मधुर पाठ,
कम शब्दों में कह देती, सुख-दुख का हर एक साथ।

क्षण भर को ठहर कर देखो, ये सौंदर्य अनुपम,
मनु! बसंती शाम में, ईश्वर भी लगता सुकूनमय सम।

स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर,सुपौल

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