मेरे घर की रौशनी है बेटी,
खिलती हुई कमल है बेटी।
घर आंगन में शोर मचाती,
चहचहाती कोयल है बेटी।
क्या बोलूं बेटी है क्या?
इसकी बहुत सरल परिभाषा।
एक मां का सपना, पिता का आंगन,
एक अनूठा संसार है बेटी।
शिक्षा गुण संस्कार राेप दो,
फिर बेटों सी सबल है बेटी।
अपना थोड़ा प्यार तो दे दो,
फिर प्रकृति सी निश्चल है बेटी।
त्याग और समर्पण सीखाकर,
नए-नए रिश्ते बनाती बेटी।
बेटी की कीमत उनसे पूछो,
जिनके पास नहीं है बेटी।
खुशबू कुमारी
मध्य विद्यालय गोला पंचायत जे पी कॉलोनी चंदवारा मुजफ्फरपुर
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