रिश्तों में है एक निराला, दोस्त हमारा। संग हमेशा जिसका मुझको, लगता प्यारा।। जिससे करते हम अपनी है, बातें सारी।[...]
Category: प्रेम
प्रेम – एस.के.पूनमप्रेम – एस.के.पूनम
ऊँ कृष्णाय नमः विधाता छंद विषय:-प्रेम – एस.के.पूनम करें हम प्रेम जीवन में, सुखद परिणाम हम पायें। मिटा कर[...]
राज को न खोलिए..रामकिशोर पाठकराज को न खोलिए..रामकिशोर पाठक
राज को न खोलिए २१२-१२१-२ राज को न खोलिए।और से न बोलिए।। प्रीति नैन में बसी।आप खास हो लिए।। शब्द-शब्द[...]
फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठकफिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक
कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा[...]
अधूरे प्रेम कहानी की किताब – चित्तेश्वर झाअधूरे प्रेम कहानी की किताब – चित्तेश्वर झा
अधूरे प्रेम कहानी की किताब : हम वो किताब हैं जिसके आखिरी पन्नों पर दिल दस्तक देती है और मांगती[...]
करवा चौथ -स्नेहलता द्विवेदीकरवा चौथ -स्नेहलता द्विवेदी
पिय मन भायो मैं तो सखी बस प्रेम पुजारन, पिय के हिय में रहूँ सिया बन। मैं भोली हूँ प्यार[...]
भावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वराभावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वरा
हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो या कि लगे[...]
लिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनमलिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनम
विधाता छंद। विधान-1222*4(लिखी हूँ प्रेम पाती प्रिय)(1)गगन हो या धरा पर हो,तुम्हें सत्कार जन-जन में। तुम्हीं को देख जीती हूँ,प्रणय[...]
माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी
भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]
प्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमारप्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमार
एक आहट जैसे प्रिय के पाँवों की हल्की चाप, एक सुखद अहसास ऐसे जैसे स्नेह रस से सींचती माँ, एक[...]
