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भोर हुआ..रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

बिंदु छंद 10 वर्ण।
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भोर हुआ अरु लाली छायी।
पंकज नैनन है हर्षायी।।
नाच रहे खग डाली-डाली।
हाथ अथाह बजाए ताली।।

मारुत पश्चिम से है आया।
भाव सुवासित गाना गाया।।
हर्षित हैं तरुओं की डाली।
झूम उठें बगियों के माली।।

देख सरोवर योगी दौड़े।
स्नान किये कर छाती चौड़े।।
बोल रहे बम भोले-भोले।
बंद किए नयनों को खोले।।

राह बनी अब जो थी खाई।
चाह नवीन दिलासा लाई।।
हे”अनजान”!उठाओ माथा।
छंद रचाकर गाओ गाथा।।
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रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ भोर
मध्य विद्यालय दरवेभदौर

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