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तुम कौन हो?-डॉ स्नेहलता द्विवेदी

तुम कौन हो?

उसने पूछा, आखिर कौन हो तुम?, उर्वशी मेनका ,इंद्राणी,
या अपाला लोपा घोषमुद्रा!
यशोदा , राधा रुक्मिणी सीता,
या कुंती द्रौपदी!
आखिर कौन हो तुम?

आग में जलती गोल रोटी के लिए रागिनी!
धूप में जलती हरियाली के लिए कर्म योगिनी!
जिंदगी की तपिश में भी इठलाती संगिनी!
गर्वित मां, स्नेहिल बहन, मन की आशा जाया !
आखिर कौन हो तुम?

देश को दिशा देती इंदु या तेज,
उड़न परी!
व्योम को चीरती कल्पना,
या अवनी!
देश की सीमाओं पर पसीने की सुगंध,
या दफ्तर की शान,
विद्यालयों में राष्ट्र को गढ़ती मनीषी,
या संसद की नेत्री!
आखिर कौन हो तुम?

धवल कांति , अद्भुत शांति हो,
या गृहस्वामीनी
जननी दुलार की प्रतिमूर्ति हो,
या दामिनी!
पतित पावनी अविरल गंगा हो,
या पापमोचिनी!
धर्म ध्वज को धारण करती दुर्गा हो
धर्म दंड धारिनी!
आखिर कौन हो तुम?

विज्ञानी ज्ञानी श्रेष्ठ सुहानी हो,
या चिकित्सक ध्यानी,
स्वयं को ढूंढती अधीर खोजी भ्रमित जीव, या धीर गंभीर ज्ञानी!
जटिल हो बहुत ही जटिल अकल्पनीय
या सरल सुलझी गंगोत्री!
आखिर कौन हो तुम?
मैं नारी इक्कीसवीं सदी की,
सबल सशक्त आत्मनिरभर !
मैं नारी हूं बस नारी!

डॉ स्नेहलता द्विवेदी ‘ आर्या ‘
उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय शरीफगंज कटिहार

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