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जय मां शारदे

माँ तू अपने शरण में रखो अब सदा,
है नमन कोटि रखना चरण मे सदा.
तू दे दे हमें माँ ये आशीष कदा,
ज्ञान जीवन में सुरभित रहेगा सदा.

जब कभी इस धरा में तिमिर तोम हो
जब कभी देश में रात हो व्योम हो.
सूर्य का तेज देना प्रखर शारदे
जिससे जीवन सफल न्याय समवेत हो।

चरैवेति चरैवेति का कर वरण
रहे निर्मल सदा ही मेरा आचरण
न ही विचलित कभी भी ये मन चित् मेरा,
रहे हरदम सुवासित मेरा आवरण

डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्या
उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय शरीफगंज कटिहार

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