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एक छोटा बच्चा था-कार्तिक कुमार

एक छोटा बच्चा था, मन से बड़ा सच्चा था।

नन्हे-नन्हे उसके सपने, आँखों में उजियारा था।

मीठी उसकी प्यारी बोली, सबको बहुत सुहाती थी।

हँसी बिखेरता हर पल वह, खुशियाँ घर ले आती थी।

माँ की बातें मानता था, पिता का मान बढ़ाता था।

गुरुओं का आदर करता, ज्ञान का दीप जलाता था।

पुस्तकों से प्रेम था उसको, रोज़ नया कुछ सीखता था।

सच की राह पर चलकर, जीवन सुंदर लिखता था।

मिल-जुलकर वह खेलता था, किसी से बैर न रखता था।

दीन-दुखी की सेवा करके, मानवता का पाठ पढ़ता था।

पेड़ लगाना अच्छा लगता, प्रकृति से नाता जोड़ता था।

पशु-पक्षी से प्रेम कर, दया का भाव सँजोता था।

मेहनत को अपना साथी मान, हर मुश्किल से लड़ता था।

हार मिले तो फिर उठकर, आगे बढ़ना जानता था।

सपनों को सच करने का, उसने सुंदर प्रण लिया।

ईमान, साहस और सदाचार का, जीवन भर व्रत किया।

ऐसे बच्चों से ही जग में, भारत का सम्मान बढ़े।

ज्ञान, संस्कार और सेवा से, हर घर-आँगन फूल खिले।

एक छोटा बच्चा था, सबका प्यारा लगता था।

अपने अच्छे कर्मों से वह, जग में उजियारा करता था।

कार्तिक कुमार

मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली 704318121

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