भाग्य से तो केवल जीवन मिलता है जग में,
पर बेटी का आना महा-सौभाग्य कहलाता है।
जिस घर में गूंजे नन्हीं पायल की झंकार,
वहां साक्षात विधाता का आशीष उतर आता है।
जन्म लेते ही वह नन्हीं सी कोमल कली,
भाग्य के दसों द्वार एक साथ खोल देती है।
अंधियारे कोनों में भर देती है वो उजाला,
खामोश पड़े रिश्तों में मिश्री सी घोल देती है।
वह अपने संग ही लाती है वैभव और खुशहाली,
उसकी मासूम मुस्कान में छुपी हर सौगात है।
जो सूखी पड़ी थी कल तक जीवन की क्यारी,
आज वहां अमृतमयी रिमझिम सी बरसात है।
महक उठता है कोना-कोना उस नन्हीं खुशबू से,
पूरा घर-आँगन जैसे पावन उपवन बन जाता है।
खिल उठते हैं खुशियों के अनगिनत कमल वहां,
जहां भी उस लक्ष्मी के नन्हे कदमों का साया पड़ता है।
उसकी तोतली बोली में छुपा वेद का ज्ञान है,
उसका अल्हड़पन ही तो माता-पिता की जान है।
वह जब हँसती है तो गम के बादल छँट जाते हैं,
बेटी तो हर डूबती कश्ती का सच्चा पतवार है।
वह सिर्फ एक बेटी नहीं, वो तो नव-प्रभात है,
दो कुलों को महकाती हुई स्नेह की वो बहती धारा है।
जिस घर में जनमी है ऐसी प्यारी सी लाडो,
वो घर इस पूरी सृष्टि में सबसे न्यारा है।
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया
