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जिंदगी की दास्तान—गिरींद्र मोहन झा

Girindra Mohan Jha

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जिंदगी की दास्तान
बचपन, जवानी, बुढ़ापा से होकर बीते जीवन महान,
जीवन-पथ पर बढ़ते जाते, कर्म ही होती हमारी पहचान,
जन्म-मृत्यु के मध्य स्थित, जीवन यह कर्म प्रधान,
उज्ज्वल जिनका कर्म है, जीवन है वही महान,
ज्ञान, कर्म के साथ श्रेष्ठ अनुभव भी हमें मिलता जाता,
यह तीनों ही आते हैं स्वयं के साथ मानव समाज के काम,
धैर्य, धर्म, साहस कभी न हारना, मानव जीवन है संग्राम,
जग में कर्म से अमिट छाप छोड़ना, जिंदगी की यही दास्तान।
……गिरीन्द्र मोहन झा

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