Site icon पद्यपंकज

तू जीवन पथ पर चलता जा -गिरिंद्र मोहन झा

Girindra Mohan Jha

Oplus_131072

तू जीवन-पथ पर चलता जा,
कार्य सृजन के करता जा,
….. जन्म-मृत्यु के मध्य स्थित,
है जीवन कर्म प्रधान,
उज्ज्वल जिसका कर्म है,
है जीवन वही महान।
तू सतत ज्ञान प्राप्त करता जा,
तू जीवन-पथ पर चलता जा,
कार्य सृजन के करता जा,
…… आत्मप्रगति के साथ तू
निरंतर परोपकार कर,
मनसा, वाचा, कर्मणा,
अर्थपूर्ण कार्य निरंतर कर,
स्वयं में स्थित होकर बढ़ता जा,
तू जीवन-पथ पर चलता जा,
कार्य सृजन के करता जा,
…….स्वयं में निरंतर सुधार कर,
हर तरह से खुद का विकास कर,
राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो,
लोक-हित, राष्ट्र-हित का कार्य कर,
खुद के, दूसरों के अनुभवों से अच्छी बातें सीखता जा,
तू जीवन-पथ पर चलता जा,
कार्य सृजन के करता जा,
प्रतिदिन कुछ नवीन सीख,
सीखे हुए को योग्य लोगों में बांट,
सद्गुणों को निरंतर तू धारण कर,
दुर्गुणों को अपने जीवन से छांट,
कर्त्तव्य-कर्म के मार्ग पर अकेले भी बढ़ता जा,
तू जीवन-पथ पर बढ़ता जा,
कार्य सृजन के करता जा ।
गिरीन्द्र मोहन झा

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version