हम शिक्षक हैं, हम युग-निर्माता, हम इस सृष्टि के दर्पण हैं,
छात्रों के हर एक आवेगों का, हँसकर करते हम तर्पण हैं।
क्रोध, चंचलता, नादानी, हम सब चुपचाप समाहित करते,
जैसे शिव ने विषपान किया, वैसे हम मन को शांत धरते।
कभी डांट में छिपी दुआएँ हैं, कभी प्यार का सागर लाते हैं,
उद्दंड हवा के झोंकों को, हम पावन संदली बनाते हैं।
जो राह भटकने लगते हैं, उनका हम हाथ थाम लेते,
अपनी खुशियों का त्याग कर भी, बच्चों को उत्तम नाम देते।
लाख कष्ट हों जीवन में, या राहों में अंगारे बिखरे,
पर कदम न पीछे हटते हैं, ताकि हर इक नौनिहाल निखरे।
हम खुद जलकर दीपक की तरह, जग को आलोकित करते हैं,
अज्ञान मिटाने की खातिर, हम ज्ञान का अमृत भरते हैं।
हम धूप सहते हैं सिर पर, पर उनको शीतल छाँव मिले,
वे छू लें ऊँचे अम्बर को, चाहे हमारे छाले पाँव मिले।
हर एक परीक्षा से पहले, हम खुद भी सौ बार सुलगते हैं,
जब तक न सँवर जाए जीवन, तब तक हम कहाँ ठहरते हैं!
काटों की राहों पर चलकर, हम कोमल कलियाँ चुनते हैं,
रातों की नींद गँवाकर भी, हम कल के सपने बुनते हैं।
हाँ, हम ही वो शिल्पी हैं जो, माटी को मूरत करते हैं,
श्रम की स्याही से बच्चों के, स्वर्णिम इतिहास को लिखते हैं।
हम भाग्य विधाता भारत के, हम राष्ट्र-निर्माण की धड़कन हैं,
हर छात्र के उज्वल कल के लिए, हमारा पल-पल अर्पण है
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया
