तीन रंगों में बंधा हुआ,
भारत माँ का स्वाभिमान है।
केसरिया बलिदान कहे,
श्वेत शांति की पहचान है।
हरित रंग में जीवन बहता,
आशा का मधुर संदेश लिए,
अशोक चक्र की गति बताती,
धर्म-पथ पर अविराम चले।
जब-जब लहराए नभ-मंडल में,
सीना गर्व से भर जाता है।
वीरों का इतिहास सुनाकर,
नव भारत को गढ़ जाता है।
सीमाओं पर जो प्राण लुटाते,
उनका ऋण कैसे चुकाएँ हम?
तिरंगे के मान की खातिर,
जीवन-दीप सदा जलाएँ हम।
न जाति रहे, न भेदभाव हो,
एकता का उद्घोष बने।
हर हृदय में तिरंगा बसकर,
भारत का नव घोष बने।
आओ शपथ आज हम सब लें,
इस ध्वज को शीश नवाएँगे,
तन-मन-धन अर्पित कर इसके,
सम्मान सदा बढ़ाएँगे।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर, सुपौल
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