अंगिका कविता
1.
पानी
पानी पानी होय गेलय
लोग पानी रॅ प्रबंध मॅ
तैयो कोय नै सोचय छै
पानी रॅ संबंध मॅ ।
ताल तलैया सुखी गेलय
सुखलय गांमाॅर कुईयाँ
दूर दराज सॅ पानी लानैम
छुटय छै आबे धुईयाँ ।
दिक्कत सहतै मकटा ढोते
पर पानी कोय नय बचैतय
हम्में तोंय गर नय सोंचभऽ
अगला पीढ़ी कैसं जितय ।
बिन पानी जीना दुभर छै
पानी रॅ कीमत पहचानाॅ
कैसं जल संरक्षण होतय
लिखलॅ पढ़लॅ लोगस् जानाॅ।
सब राॅ जड़ छै गाछ बृक्ष
गाछ लगैभाॅ त वर्षा होथों
वर्षा जौं जमीक बरसलौं
तब तं सब दुख दूर हो जैथों ।
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2.
आपनो धरती
बड़ा बढ़ियां छै धरती आपनो
चमचम करै छय धुप
शाम कऽ जब तारा उगय छै
निखरी जाय छय रूप ।
जब रंग बिरंग रॅ फूल खिले छै
चिड़िया चुनमुन गावै छै,
खेतम् जब फसल लहराय छै
दुख दलिद्दर भागै छै।
करिया मेघ जल बरसाय क
धरती रॅ मिटाय छै भूख,
शाम कऽ जब तारा उगय छै
निखरी जाय छय रूप ।
पहाड़र चोटी अकाश छुवै छै
वहीं सॅ कलकल नदी बहैछै,
कहीं कहीं छय घन्नो जंगल
जहाँ हाथी शेर भालू रहि छै।
दोसरो देशस् आवैवला कऽ
यहाँ मोन लागय छै खुब,
शाम कऽ जब तारा उगय छै
निखरी जाय छय रूप।
मधुमासो मं तॅ ई धरती
एतना बढ़ियाँ लागय छै,
फल फूल सॅ सजीधजी क
नपकी कनियां लागय छै।
मंद – मंद पछिया चलय छै
मजा आवय छय खूब ,
शाम कऽ जब तारा उगय छै
निखरी जाय छय रूप ।
~ * ~
3.
जंगल झार
जंगल-झार , बाग-बगिचा धरती रॅ सिंहार होय छै
रोगवियाद भगावैर लेली ओकरैस् जड़ीबूटी मिलैछै
आदमी रॅ वहशीपन देखऽ जंगल उजाड़िक् झुमैं छै,
जंगली जानवर जंगल छोड़िक् जन्हैं-तन्हैं घुमय छै।
कभी कटै छै रेलोमॅ तॅ कभी भीड़ोरॅ शिकार बनै छै,
नेता सिनी अखबार पढिक् झुठमुट चित्कार करै छै।
पहिलो जैसनो कहाँ छै आबे जंगल मॅ घन्नो गाछ,
आपनो स्वार्थपूर्ति रॅ कारण आदमी करै छै विनाश।
चालचलन जौं अहिने रैतै बादम् बड़ा पछतैतै लोग,
पर्यावरण जौं बिगड़ी जयतै बेमौत मरि जयतै लोग।
ठंडा मॅ ठंडा खूब होतय , गरमीम् पड़तै गरमी खूब,
जत्त सुख भोगै छै अखनी बादम् होतय ओतने दुख।
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4.
जल्दी झड़ी परावो नी
हे भगवान है की करय छो
कनयोटा दया देखावो नी,
गरमी सं सब मरी रहिलो छै जल्दी झड़ी परावो नी।
जंगलझार सब झरकी गेलय
जीव जन्तु सब तरसी गेलय
तालतलैया भी आवे सुखलै
कोय उपाय लगावो नी,
गरमी सं सब मरी रहिलो छै जल्दी झड़ी परावो नी।
जौं एक्को बार बरसतै मेघ
हरा भरा होय जयतै खेत
बाग बगिच्चा हरिहर होतय
कोनो भांज लगावो नी,
गरमी सं सब मरी रहिलो छै जल्दी झड़ी परावो नी।
चिड़िया चुनमुन कीट पतंगा
सब कॅ छौं तोरे सं आस
सबरो गल्लो सुखी गेलो छै
धरती रो प्यास बुझावो नी,
गरमी सं सब मरी रहिलो छै जल्दी झड़ी परावो नी।
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5.
दु रोटी खिलावऽ त जानिहौं
जेकरॅ घरॅम् छप्पर नय छै,
ओकरॅ तिरपाल बनऽ त जानिहौं।
जेकरा कुच्छू लौकय नै छै,
ओकरॅ मशाल बनऽ त जानिहौं।
सच बोलै रॅ कुव्वत छौं त
बड़कवा रॅ दोष बतावॅ त जानिहौं ।
झगड़ा लगाना तॅ बड़ा सोझऽ छै
राम रहीम कॅ मिलावऽ त जानिहौं।
नेतवार् तलवा रोज सहलाय छऽ
मायबापर गोड़ दबावऽ तॅ जानिहौं ।
मंदिर मॅ दान देला सॅ कुच्छू नै भेथौं
मगंनियांक दु रोटी खिलावॅ त जानिहौं।
बेटाक पढ़ाय छऽ इंलिश इसकूल मॅ,
बेटीक् सरकारियोम् पढ़ावॅ त जानिहौं।
समाजऽर माहौल बिगाड़ै जे कोय
ओकरा दु तड़ी लगावऽ त जानिहौं।
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6.
पढ़ना बहुत जरूरी छै
पेट रॅ आग भुतावै वास्तऽ
कुछ करना बहुत जरूरी छै,
आपनॅ हक कॅ पावै वास्तऽ
लड़ना बहुत जरूरी छै ।
हाथम हाथ धरीक बैठला सॅ
भुखले जान चलऽ जैथों,
गरीब गुरबाक् सताय वला कॅ
कुटना बहुत जरूरी छै ।
बस एक्के उपाय छौं भैया
बच्चा चिल्काक खुब पढ़ावॅ
दुनियादारी सॅ निपटै वास्तऽ
पढ़ना बहुत जरूरी छै ।
बड़ॅ बुजुर्गर हाथ मथा पॅ
रहना बहुत जरूरी छै,
समाजॅम् सभ्भेस् मिलिजुलीक
रहना बहुत जरूरी छै।
सोची समझीक् डालिहऽ वोट
नै तऽ बादम् बड़ा पछतै भऽ,
सभ्भेर हितम् काम करै जे
वही सरकार जरूरी छै।
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7.
मिलिजुलीक रहऽ
मिलिजुली कऽ रहिबला रॅ
हसीखुशीम् दिन गुजरै छै,
आपसी तालमेल रखला सॅ
कहियो नय घर उजड़ै छै।
कोनो ऐसनो घर नै छै,जहाँ
कनीमनी टनभन नै होय छै,
समझदार जे लोग रहि छै
इ सब बात इग्नोर करै छै ।
मिलिजुली कऽ नै रहिला सॅ
दोसरऽ कोय फैदा उठयथौं,
दोस मोहिम कर कुटुम भी
घर तोरऽ आवैस् कतरैथौं ।
टोला समाजर लोगस् भी
बढ़ियां संबंध बनैलो राखऽ,
बेला वक्तम् देथौन काम
खुद्देक् तों सुप्रीम नै आंकऽ।
मिलिजुलीक जौं रहिबॅ तोंय
सुख शांति बरक्कत मिलथौं
मन आनंदित रहिथौं हरदम
बड़ऽ बुजूर्ग भी अच्छा कैथौं ।
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8.
बच्चा कॅ जरूर पढ़ावो तों
बच्चा चिल्काक् डाँटी धोपी कॅ
बढ़ियां व्यवहार सीखावो तों,
बच्चा होय छय कच्चा मट्टी
बढ़ियां रंङ घड़ा बनावो तों ।
पढ़ाय लिखाय छै बहुत जरूरी
जैसं भी होवों पढ़ावो तों,
पर ध्यान रहै कि मासूम छै ई
ज्यादा नय बोझ बढ़ावो तों।
जेतना जान सकै बुतरु रॅ
बस ओतने समझावो तों ,
बच्चा होय छय कच्चा मट्टी
बढ़ियां रंङ घड़ा बनावो तों ।
पढ़ाय लिखाय रॅ साथे साथ
खेलकूद भी छै बड़ा जरूरी,
नैतिक आरू व्यवहारिक बात
बुतरू कॅ जरूर बतावो तों
जे जीवन मॅ काम आवय छै
वैसने सब पाठ पढ़ावो तों
बच्चा होय छय कच्चा मट्टी
बढ़ियां रंङ घड़ा बनावो तों ।
बच्चा चिल्का शिक्षित होयकॅ
शिक्षित समाज बनैतय हो
देशहित मॅ काम करि कॅ
देश रॅ मान बढ़ैतय हो
तोरास् बस ऐतने कहना छौं
जैसं भी होवों पढ़ावो तों
बच्चा होय छय कच्चा मट्टी
बढ़ियां रंङ घड़ा बनावो तों ।
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9.
शिक्षित जौं होय जैभऽ तऽ
जिनगीर् सब दुखदर्द मिटिजैथौं
जौं शिक्षाक् अपनैभऽ तऽ,
आपनो ग्यान भी बढ़तें जयथौं
दोसराक् बुद्धि बतयभऽ तऽ,
ई धरती पॅ गुरुस् बढ़ी कॅ
आरू कोय प्राणी हीं नय छै,
कुछभी पहुँच सॅ दूर नै रहतौं
जौं गुरुवाणीक् अपनैभऽ तऽ।
जिनगीर् सब दुखदर्द मिटिजैथौं
जौं शिक्षाक् अपनैभऽ तऽ।
जीवन जियैर् कला सिखाय छै
अच्छा अच्छा बात बताय छै,
पालन पोषण तोरऽ कैसं होथौं
हरेक बात गुरूवे बताय छै,
आफत विपत सब मिटिजैथौं
गुरु चरण मॅ शीश नवैभऽ तऽ।
जिनगीर् सब दुखदर्द मिटिजैथौं
जौं शिक्षाक् अपनैभऽ तऽ।
जीवन सरल सुलभ होय जैथौं
रस्तांम कोय अड़चन नय ऐथौं,
गुरुजी ऐसनो दीपक होय छै
अज्ञानरुपी तोरऽ अन्हार भगैथौं,
जीवन तोरऽ सफल होय जैथौं
शिक्षित जौं होय जयभऽ तऽ।
जिनगीर् सब दुखदर्द मिटिजैथौं
जौं शिक्षाक् अपनैभऽ तऽ।
~ * ~
10.
परदेश नय जा काका
खेती खुल्ला छोड़ी कऽ
परदेश नय जा काका,
बच्चा चिल्का बिगड़ी जैथौं
तऽ की करभो टाका ।
देख रेख मँ रहिथौं तऽ
पढ़भो लिखबो करथौं
मर मजूरी मँ थोड़ऽ थाकऽ
हाथो तोरऽ बटैथौं ।
परिवार संङ रहि रऽ उमर
परदेश मत बिताबऽ,
घरऽ रऽ नून रोटी सँ बढ़ियां
कोय खाना छै तऽ बताबऽ।
दोस मोहिम टोला समाज रऽ
साथम् रहिक त देखऽ,
हायहाय करिक् टका कमायकॅ
की साथऽ मँ जैभो लेकऽ ।
आधी बांटी खेत करीकऽ
याहीं बचाबऽ दु टाका,
बच्चा चिल्का कऽ छोड़ीकऽ
परदेश नय जा काका ।
~ नैतिक ~
