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ईद-मनु कुमारी

प्रेम की सौगात लेकर ईद है आई, 

हर आंगन और गली – गली में खुशियां छाई।

नये – नये कपड़े पहने हैं हामिद,सलमा,

दुआ करेंगे रब के आगे,पढ रहे हैं कलमा।

नफरत की दीवारों को हम मिलके गिराएं,

इक – दूजे को गले लगाकर आओ ईद मनायें।

दुआ के संग – संग आज, मिलेंगे बड़ों से ईदी,

मेले लेकर चली है ,सबको प्यारी दीदी।

हामिद को ना चाहिए कोई खेल खिलौना,

दादी का जला हाथ देखकर आया रोना।

चिमटा लिया खरीद खुशी का नहीं ठिकाना,

बुद्धि हामिद का देख,दादी को आया रोना।

स्वरचित एवं मौलिक 

मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर,सुपौल

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