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जारी रखना-संतोषी कुमारी 

बागों से वादों को निभाना जारी रखना,

पतझड़ में भी बाग सजाना जारी रखना।

पत्ते टूटें, पर शाख बचाना जारी रखना,

पतझड़ में भी बाग सजाना जारी रखना।

बीत चुके मधुर मधुमास की यादों में,

सूखे पल्लव की क्रन्दित आवाज़ों में,

तन्हाई का सबसे प्यारा मीत मिलेगा,

अस्फुट शाश्वत सा कोई संगीत मिलेगा।

बस सृजन के राग सुनाना जारी रखना,

पतझड़ में भी बाग सजाना जारी रखना।

आँखों-आँखों में अनगिनत रात कटी हो,

सुख की जीवन से सारी रेखाएं मिटी हो।

पलकों पर जलते हों आंसू के अंगारे,

तन्हा शाम किसी अपने की बाट निहारे।

इन घड़ियों में भी मुस्काना जारी रखना,

पतझड़ में भी बाग सजाना जारी रखना।

सबको साथ ले चलने वाली हाथ चाहती,

सफलताएं तो वीर मनुज का साथ चाहती।

हिम्मत रखने वाले जीत ही जाते हैं,

सुख के बादल देर से लेकिन आते हैं।

कठिनाई के नाज़ उठाना जारी रखना,

पतझड़ में भी बाग सजाना जारी रखना।

संतोषी कुमारी 

विद्यालय अध्यापिका 

उत्क्रमित मध्य विद्यालय

जगवन कटैया, बिस्फी, मधुबनी

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