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जूता-राम किशोर पाठक 

Ram Kishore Pathak

Ram Kishore Pathak

चलने खाली पैर न देता।

ठोकर सारे वह सह लेता।।

रखे शूल से पाँव अछूता।

क्या सखि? साजन! न सखी! जूता।।०१।।

मेरा हर-पल शान बढ़ाए।

उसके संग न मन घबराए।।

रक्षक जैसे फल का सरही

क्या सखि? साजन! न सखी! पनही।।०२।।

लिपट संग में जब चलता है।

ठोकर शूल हाथ मलता है।।

लगे नहीं पथ कभी भयावह।

क्या सखि? साजन! न सखि! उपानह।।०३।।

उसके संग सदा इठलाऊँ।

पथ बाधा से नहीं घबराऊँ।।

निर्भीक त्वरित दौड़ लगाऊँ।

क्या सखि? साजन! न सखि! खड़ाऊँ।।०४।।

मेरे कदमों को जब चूमे।

हर्षित होकर मन तब झूमें।

घूम सकूँ बेझिझक तालुका।

क्या सखि? साजन! न सखि! पादुका।।०५।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक 

प्रधान शिक्षक 

सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।

संपर्क – ९८३५२३२९७८

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