भारतीय भाषा उत्सव
प्रस्तुति – कार्तिक कुमार
छोटकी बुचिया पढंल हमार
नन्ही बुचिया पढ़े-लिखे, हो जाव होशियार,
ज्ञान के जोती जलाव हो, चमकी संसार।
भोर भिनसारे उठ के बच्चा, स्कूल जाए रोज,
किताब-कॉपी साथे लेके, करे ज्ञान के खोज।
गुरुजी देसें सीख बढ़िया, साँच अउर व्यवहार,
पढ़-लिख के बच्चा बनिहें, देश के रखवार।
क ख ग घ सीखत-सीखत, सपना ले उड़ान,
मेहनत से आगे बढ़िहें, पाई ऊँच स्थान।
मोबाइल से दूर रहS, पढ़ाई में मन लगा,
माई-बाबू के सपना पूरा, जग में नाम कमा।
हिंदी भोजपुरी मैथिली, सब भाषा के मान,
भारत माई के गोद में, सबके एक समान।
खेले-कूदे संग पढ़ाई, ई सबसे बढ़िया बात,
ज्ञान बिना सूना लागे, जीवन के हर रात।
नन्हा-नन्हा दीप जले जब, दूर होई अँधियार,
पढ़ल-लिखल बच्चा बनिहें, देश के आधार।
आवा मिलके कसम उठाईं, करीं सच्चा काम,
पढ़-लिख के रोशन करब, भारत देश के नाम।
लेखक कार्तिक कुमार
जिला शिक्षा पुरस्कार प्राप्त
म.वि.कटरमाला गोरौल वैशाली
7004318121
kartikyog.kumar@gmail.com

