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कर्मों का फल – कार्तिक कुमार

कर्मों का फल
प्रस्तुति कार्तिक कुमार
सचिन जिला योग संघ वैशाली
विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली वैशाली 7004318 121
मानव जीवन कर्मों का, अद्भुत एक विधान,
जैसा बोओ वैसा पाओ, यही सृष्टि का ज्ञान।
पूर्व जन्म के कर्मों से, बनता जीवन हाल,
सुख-दुख के इस खेल में, कर्मों का ही जाल।
प्रारब्ध कर्मों का फल, साथ हमारे आए,
हँसी कभी तो आँसू बन, जीवन में छा जाए।
संचित कर्मों की गठरी, जन्मों से संग रहती,
अच्छे-बुरे हर कर्मों की, गाथा भीतर बहती।
क्रियावान कर्म वही हैं, जो हम आज करें,
सत्य दया और प्रेम से, जीवन पथ को भरें।
कर्म बिना न मिलता कुछ, यही प्रकृति का नियम,
जैसा होगा आचरण, वैसा मिलेगा श्रम।
सुख आए तो मत इतराओ, दुख आए मत रोओ,
हर परिस्थिति में प्रभु का, सुंदर संदेश संजोओ।
अच्छे कर्मों की ज्योति से, मन का तम मिट जाए,
सेवा, योग और साधना से, जीवन सफल हो जाए।
कार्तिक कुमार का कहना, सुन लो प्यारे मित्र,
कर्म सुधर जाए यदि मानव, बन जाए जीवन चित्र।

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