शीर्षक - आज की युवा
किसी को तुम मिटाते हो,
कोई तुमको मिटाता है।।
ये वक्त की वो आंधी है,
जिसमें सब लुभाते है।।
ना किसी को है सम्मान गर दिल में,
मगर सब दिल क्यों जलाते है
किसी को तुम मिटाते हो,
कोई तुमको मिटाता है।।
मुखौटे ओढ़ कर अब तो चलते लोग यहां है अब,
पीछे लोहे की खंजर चलते लोग यहां है अब।।
माना तुम में है खून सम्राट अशोक की,
फिर क्यों नहीं छक्के छुड़ाते देश के दुशासन की।।
तुम से है तुम्हारे जीवनदाता को अभिमान,
फिर क्यों कर रहे उन्हें परेशान।।
जिन्होंने तुम्हें बुढ़ापा का सहारा माना।
उन्हें ही तुमने कर दिया काम तमाम।।
किसी को तुम मिटाते हो,
कोई तुमको मिटाता हैं।।
शिक्षिका – कुमारी रूपरानी
मध्य विद्यालय चंदनपट्टी, सकरा, मुजफ्फरपुर, बिहार
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