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क्या सच में आज अहिंसा दिवस है?-रिंजू कुमारी

Rinju Singh

Rinju Singh

कागज़ों पर लिखकर अहिंसा,

क्या सच में हम बदल पाए हैं?

हिंसा तो हर ओर दिखाई देती,

फिर किस बात पर इतराए हैं?

समाज में हिंसा देखने से पहले,

क्यों न खुद के भीतर झाँकें,

दूसरों में दोष तलाशने से पहले,

अपने ही मन के द्वेष को आँकें।

शब्दों में भी हिंसा होती है,

नज़र में भी तिरस्कार,

कभी मौन बनकर चुभती है,

कभी बन जाती है व्यवहार।

जरूरत है पहले अपने भीतर

क्रोध, घृणा को हराने की,

अहंकार की दीवार गिराकर,

इंसानियत को अपनाने की।

अहिंसा केवल दिवस नहीं,

यह जीवन का संस्कार बने,

पहले मन में शांति खिले,

फिर दुनिया भी शांत बने।

बदलाव की शुरुआत दूसरों से नहीं,

आज अपने आप से करें—

तभी अहिंसा दिवस का अर्थ,

सच में सार्थक हम करें।

रिंजू कुमारी

 फारबिसगंज अररिया

 बिहार

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