मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो
खुले नीले आकाश में,
मेरे पैरों में धागा न बाँधना
नही तो गिर जाउंगा मझधार में।
अभी मैं हूँ बहुत हीं छोटा
मैं हूँ पतंग पवन का बेटा,
और बच्चों से थोड़ा हूँ मोटा
देखने में हूँ काला कलूटा।
बछड़े की तरह मुझे खूँटे में मत बांधो
मुझे किसी बात पर नहीं डाँटो,
मैं भोला- भाला एक बच्चा
दिल का बड़ा नेक और सच्चा।
मैं साल में एक बार आता हूंँ
मकरसंक्रांति पर्व लाता हूंँ,
बच्चे मेरे पैरों में जब धागा बाँधता
तब मैं बहुत दुखी हो जाता ।
बँधा रहता सबके हाथ में
घूँमता रहता आकाश में,
जब मैं किसी के हाथों से छूटता
सीधे मुँह धरती पर गिरता।
मैं पतंग पक्षियों की तरह हूँ
रंग- बिरंगे पेपरों से बना हूँ,
मेरा काम है आकाश में घूमना
बादलों की सैर है करना।
नीतू रानी विशिष्ट शिक्षिका
म०वि० रहमत नगर
सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार
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