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मैं तो हूं दिलवाला – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

Jainendra

Jainendra prasadRavi

कोई करें सजदा मंदिर में या भजन करें शिवाला।

मैं घूमूंँ गलियों में यूं ही बनकर बंसी वाला।।

हिंदू-मुस्लिम सिख-इसाई सबको मीत बनाऊंँ,

साथ गाऊंँ कव्वाली-होली मिलकर ईद मनाऊँ।

मुझे नहीं है बैर किसी से मैं तो हूंँ दिल वाला।।

भाई से भाई को बांँट चलाते जो नफरत की दुकान,

निजी स्वार्थ के खातिर अपना जो बेचते हैं ईमान।

आपसी भाईचारे का रिश्ता है सब रिश्ते से आला।।

मंदिर में भी शीश झुकाऊँ, मस्जिद में पढ़ूंँ अज़ान,

हिंदू-मुस्लिम नहीं ईसाई सिर्फ कहलाऊँ इंसान।

इंसानियत की हो सिर पर टोपी और दोस्ती की कर में माला।।

वही है अल्लाह वही है ईश्वर वही खुदा रहमान,

वही किसी के लिए कहीं पर बन जाता भगवान।

राम-रहीम वो कृष्ण-करीम ही सबका है रखवाला।।

मैं घूमूं गलियों में यूं ही बनकर बंसी वाला।।

जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

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