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मेरी माँ – कुमारी मधु

मन के कोने में एक झनकार सी उभरती है,

सूखती आंखें,कांपते होठ,फिर भी ममता मयी चेहरा लिए मुझे सुबह शाम याद करती है,मुझे

पेड़ों पौधों से ही नहीं घर की खूंटों से बंधी मेरी प्यारी, बुधिया से भी बातें करती है मेरी।

फिक्र है,जिसे मेरी

सबसे ज्यादा, मैं सोती थी जब जागती थी वो रात भर। हां कोई और नहीं

वो थी मेरी मां,बस मेरी मां

 

कुमारी मधु

प्रधानाध्यापक -उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय मधुबन, मधेपुरा

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