विद्यालय के बाग बगीचे।आओ हम सब मिलकर सींचे।
मुन्नी-मुन्ना कोमल प्यारे।आँगनबाड़ी के हैं सारे।।
इनको कक्षा में ले जाओ।ज्येष्ठ तुम्हीं हो मार्ग दिखाओ।।
आए हैं आधार बनाने।जगती की गति आज बढ़ाने।।
उम्र सरीखे पढ़ने आए। खेल प्रथम फिर आए जाए।।
रोको मत इनको बढ़ने दो। शिक्षा की सीढ़ी चढ़ने दो।।
होंगे एक दिवस ये छत पर।पूछो मत इनसे विगत पर।।
मरुथल पर बारिश जब होगी। हरियाली निश्चित तब होगी।।
घर जैसा माहौल बनाकर।रूखी सूखी आपस खाकर।।
विद्यालय परिवार चहकना।रख जारी व्यवहार महकना।।
माँगे जो भी कर दो पूरी।।डाँट बढ़ाती निजता दूरी।।
एकल छत के नीचे बर्तन।होते रहते ही हैं खनखन।।
बीता कवि “अनजान” जमाना।बंद हुआ अब दंड उठाना।।
गंगाधार बहाना सीखो। नफरत को दफनाना सीखो।।
फिर तो स्वर्ग यहीं छाएगा।बालक घर-घर मुस्काएगा।।
नाम चहक सद् ग्रंथ रखा है। बच्चा का यह नव्य सखा है।।
कवि रामपाल प्र०सिंह अनजान
मध्य विद्यालय दरवेभदौर
ग्राम पोस्ट थाना भदौर
भंडारा पटना

