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पहल-रूचिका

Ruchika

पहल

जब दूरियाँ बढ़ जाए

रिश्तों में

पहल कर लो नजदीक आने की

दूरियाँ मिटाने की।

कोई गलतफहमी

जब गाँठ बाँध ले

पहल कर लो गाँठें सुलझाने की

गलतफहमी मिटाने की।

है मुश्किल मगर नही नामुमकिन

कोई भी राह 

जो तुम्हें मंजिल तक पहुँचाए

पहल कर लो

बस कदम बढ़ाने की

मंजिल तक जाने की।

कही तुम्हारे ताले की कुंजी

प्रतीक्षारत हो

तुम्हारे ही पहल की

की तुम्हारी पहल खोल दे

हर ताला

तोड़ दे हर बंदिश

तुम्हारे होठों पर मुस्कान लाने की।

रूचिका

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी

सिवान बिहार

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