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पुस्तक -राम किशोर पाठक 

Ram Kishore Pathak

Ram Kishore Pathak

जबसे मैंने प्रीत लगाई।

हर मुश्किल का हल है पाई।।

गर्वित जिससे मेरा मस्तक।

क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०१।।

मन की पीड़ा को हरता है।

उर में वह संबल भरता है।।

दुविधा कभी न देती दस्तक।

क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०२।।

सहज समस्या हल बतलाए।

नित्य नवल ही राह दिखाए।।

भर देता है सुर वह सप्तक।

क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०३।।

सपनों को वह सच करवाता।

अंतस नूतन भाव जगाता।।

वह मेरे दु:खों का अंतक।

क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०४।।

मुझको सबसे प्यारा है वह।

देता सदा सहारा है वह।।

बना वही है भाग्य प्रवर्तक।

क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०५।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक 

प्रधान शिक्षक 

सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।

संपर्क – ९८३५२३२९७८

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