जबसे मैंने प्रीत लगाई।
हर मुश्किल का हल है पाई।।
गर्वित जिससे मेरा मस्तक।
क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०१।।
मन की पीड़ा को हरता है।
उर में वह संबल भरता है।।
दुविधा कभी न देती दस्तक।
क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०२।।
सहज समस्या हल बतलाए।
नित्य नवल ही राह दिखाए।।
भर देता है सुर वह सप्तक।
क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०३।।
सपनों को वह सच करवाता।
अंतस नूतन भाव जगाता।।
वह मेरे दु:खों का अंतक।
क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०४।।
मुझको सबसे प्यारा है वह।
देता सदा सहारा है वह।।
बना वही है भाग्य प्रवर्तक।
क्या सखि? साजन! न सखी! पुस्तक।।०५।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८
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