राधे–कृष्ण के चरणों में मिलती शांति,
नहीं रह जाती मन में कोई अशांति।
राधे नाम से मिटती मन की भ्रांति,
राधे नाम में बसती प्रेम की क्रांति।
राधे नाम का स्मरण जो करता,
मन उसका निर्मल होता जाता।
श्रीकृष्ण की शरण में आकर
मन हर चिंता से मुक्त हो जाता।
प्रतिकूल समय भी अनुकूल लगे,
जब अधरों पर राधे नाम जगे।
मन में विश्वास का दीप जले,
हर पीड़ा में आशा के फूल खिले।
श्रीभगवद्गीता का ज्ञान यही है—
कर्म करते चलना ही धर्म यही है।
सुख आए तो अहंकार न हो,
दुःख आए तो मन निराश न हो।
मन की पीड़ा सबसे बड़ा शूल,
राधे-कृष्ण करें उसे निर्मूल।
उनकी आराधना जो मन से करे,
असमंजस से जीवन को दूर करे।
प्रमाण बना प्रह्लाद का प्रेम,
जिसने हर पल प्रभु का नाम जपा।
कठिनाइयों के बीच भी उसने
विश्वास का दीप सदा जलाया।
श्रीकृष्ण ने भीड़ में पहचान लिया
मित्र निर्धन सुदामा का चेहरा,
मित्रता का मान बढ़ाकर उन्होंने
भर दिया प्रेम से जीवन उसका।
राधे नाम में प्रेम की शक्ति,
कृष्ण नाम में कर्म की भक्ति।
इन दोनों का जो ध्यान लगाए,
मन में सदा शांति ही पाए।
जय श्री राधे!
जय श्री कृष्ण!
उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
तुलसीपथ, लालापुल रघुनाथपुर
अंचल- ब्रह्मपुर,(श्री ब्रह्मेश्वरनाथ धाम)जिला – बक्सर

