सरस्वती प्रार्थना- द्विगुणित सुंदरी छंद गीत
फँसे मँझधार में हैं, दे दो किनार मैया।
कोई मिला न जग में, सुन लो पुकार मैया।।
कुछ भी समझ न आए, वक्त निकलता जाए।
अज्ञान का तिमिर यह, हमें निगलता जाए।।
दे दो हमें उजाला, ज्ञान भण्डार मैया।
कोई मिला न जग में, सुन लो पुकार मैया।।०१।।
हंस सवारी लेकर, शीघ्र ही चली आओ।
वीणा जरा बजाकर, हर शोक को मिटाओ।।
देरी नहीं करो अब, बन जा उदार मैया।
कोई मिला न जग में, सुन लो पुकार मैया।।०२।।
मातु श्वेतवसना तू, शुभता का वर दे दो।
लेकर हमें शरण में, कर मेरे सिर दे दो।।
तुम ही आस हमारी, करता गुहार मैया।
कोई मिला न जग में, सुन लो पुकार मैया।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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