दोहे
हर्षित होकर आज हम, मना रहे गणतंत्र।
भाई जैसा प्रेम हो, जन-गण-मन का मंत्र।।
भारत माँ के शान में, नभ में ध्वज उल्लास।
यह समृद्धि सुख शांति की, जग को दे आभास।।
जन-गण-मन रक्षित रहें, लेकर भाव स्वतंत्र।
भारतवासी एक हो, सफल तभी गणतंत्र।।
राष्ट्र भावना हो प्रबल, जननी से भी श्रेष्ठ।
आओ मिल-जुल कर करें, कर्म सभी हम ज्येष्ठ।।
राष्ट्र-भक्ति “पाठक” प्रबल, शीश लिए ध्वज मान।
भारत माता के लिए, अर्पित हर-पल जान।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)
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