आकाश- बाल कविता
अम्मा कहती हैं मुझे, छूना है आकाश।
मेरे सारे कार्य पर, देती है शाबाश।।
हर्षित होकर मैं सदा, करता अपना काम।
मीठी बोली से सदा, माँ लेती है थाम।।
सफल न हो पाओ अगर, होना नहीं निराश।
अम्मा कहती हैं मुझे, छूना है आकाश।।०१।।
बाधा मिलती है बहुत, हो जाता हलकान।
करते-करते काम को, लगती अधिक थकान।।
घबराना भी मत कभी, होना नहीं हताश।
अम्मा कहती हैं मुझे, छूना है आकाश।।०२।।
लगे रहे जो धैर्य से, पाते सदा मुकाम।
सफल वही जग में बनें, होता उनका नाम।।
मंजिल मिलना तय तुझे, पथ तो सही तलाश।
अम्मा कहती हैं मुझे, छूना है आकाश।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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