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सामाजिक न्याय _रामकिशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

Ram Kishore Pathak

सामाजिक न्याय- दोहा छंद गीत

न्याय शब्द ही गूढ़ है, कैसे करें बखान।
पाना सब हैं चाहते, मुश्किल होना मान।।

समता इसका मूल है, बड़ा कठिन सा कार्य।
स्वार्थ रहित जब हो सके, तब कहलाएँ आर्य।।
मिलता सतत समाज में, नित नूतन व्यवधान।
न्याय शब्द ही गूढ़ है, कैसे करें बखान।।०१।।

मन की आशा भी अलग, दिखलाती नव राह।
परिजन की भी बाध्यता, गढ़ते रहती चाह।।
समरस चलना बावरे, लगे नहीं आसान।
न्याय शब्द ही गूढ़ है, कैसे करें बखान।।०२।।

भाव श्रेष्ठता का कभी, कैसे होगा अंत।
प्रकृति कहाँ समरस कभी, सर्दी उष्ण वसंत।।
भाईचारा रख सहज, ढूँढें सकल निदान।
न्याय शब्द ही गूढ़ है, कैसे करें बखान।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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