पायल- कहमुकरी
हर स्वर कानों को प्रिय लगता।
सुनते ही जैसे चित ठगता।।
हो जाती मेरा दिल घायल।
क्या सखि? साजन! न सखी! पायल।।०१।।
भाता तन से लिपटे रहना।
आलिंगन का क्या है कहना।।
मनभावन बोली है सुमधुर।
क्या सखि? साजन! न सखी! नूपुर।।०२।।
चिपके रहना हर-पल तन से।
रिश्ता रखता जोड़े मन से।।
पुलकित हूँ मैं उसको पाकर।
क्या सखि? साजन! न सखी! झांझर।।०३।।
मन मोहित रहता है हर-पल।
भाव हमेशा उसका चंचल।।
नींद निगोड़ी को कर बैरी।
क्या सखि? साजन! न सखी! पैरी।।०४।।
उसके बिना सुना लगता है।
रूप सलोना मन ठगता है।।
संग चले जब लेकर कंदुक।
क्या सखि? साजन! न सखी! अंदुक।।०५।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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