जग कैसे सुख पाए- सार छंद गीत
हाहाकार मचा है जग में, कौन किसे समझाए।
युद्ध थमेगा अगर नहीं तो, जग कैसे सुख पाए।।
सनकी सत्ता के भोगी ने, की ऐसी नादानी।
गाजर मूली सी जनता को, जिसने हर-पल मानी।।
झूठी अकड़ दिखाता रण में, बम गोले बरसाए।
युद्ध थमेगा अगर नहीं तो, जग कैसे सुख पाए।।०१।।
बम के गोले बरस रहें हैं, साँसें टूट रही है।
वातावरण प्रदूषित होते, प्रकृति रूठ रही है।।
खुद को रखता छुपा मांद में, सैनिक मारे जाए।
युद्ध थमेगा अगर नहीं तो, जग कैसे सुख पाए।।०२।।
जनता व्याकुल महँगाई से, सुविधा सारी भूली।
भय के साये में निस दिन रह, सोचें चढ़ें न शूली।।
जीत हार हो भले किसी का, गुजरा लौट न आए।
युद्ध थमेगा अगर नहीं तो, जग कैसे सुख पाए।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८
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