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गणतंत्र का जयघोष – मनु कुमारी

गणतंत्र का जयघोष

छब्बीस जनवरी पुकार रही,
उठो! इतिहास बुलाता है।
यह दिन नहीं केवल तिथि कोई,
जन-जन का स्वाभिमान जगाता है।

जब टूटीं जंजीरें गुलामी की,
जब भारत ने प्रण यह ठाना था—
राजा नहीं, जनता सर्वोपरि,
यह गणतंत्र का फरमाना था।

संविधान बना पावन ग्रंथ,
न्याय, समानता का आधार।
धर्म, जाति, भाषा से ऊपर,
मानवता का इसमें अधिकार।

यह केवल अधिकार नहीं देता,
कर्तव्य भी हमें सिखलाता है।
जो देश के हित में जी लेता है,
वही सच्चा नागरिक कहलाता है।

लहक उठे तिरंगा जब नभ में,
तो शीश स्वयं ही झुक जाता है।
भारत माँ के चरणों में,
हर हृदय नतमस्तक हो जाता है।

युवाओं! यही समय पुकार रहा,
नारे नहीं—अब काम करो।
ज्ञान, चरित्र, अनुशासन से
भारत का नाम ऊँचा करो।

भ्रष्टाचार, हिंसा, नफरत को
मिलकर आज मिटाना है।
संविधान की शपथ निभाकर
नया भारत बनाना है।

आओ लें यह दृढ़ संकल्प आज—
हम देश नहीं, देश हम हैं।
गणतंत्र की इस पावन बेला में
हम भारत के प्रहरी हम हैं।

जय संविधान! जय गणतंत्र!
जय भारत माँ की शान!
युग-युग तक अमर रहे
मेरा भारत महान!

स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर,सुपौल,

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